मजदूर दिवस 2021
आज मजदूर दिवस है. कोविड की भीड़ में मजदूर दिवस की चर्चा लगभग नगण्य रही है आज, ऐसा लग रहा है। लेकिन क्या ये सच है? क्या सिर्फ कोविड की भयावहता के कारण मजदूर दिवस को लगभग भुला दिया गया है? मुझे नहीं लगता कि ऐसा है। वस्तुतः कोविड की मार से तो हमें मजदूर दिवस की प्रासंगिकता और अधिक लगनी चाहिए थी। पूँजी विहीन समाज के अधिसंख्य लोग पूँजी की विशाल शक्ति के आगे श्रम करते नजर आ रहें हैं। अभी तक तो श्रम आर्थिक गतिविधियों से इंगित किया जाता रहा है किंतु 21वी सदी ने श्रम को जीवन में जिंदा रहने की शर्त से जोर दिया है, घर से लेकर अस्पताल होते हुए श्मशान/कब्रिस्तान तक हम सब आज एक साँस के लिए ही श्रम कर रहें हैं। सांसे ही पूँजी बन चुकी हैं और साँस की इस पूँजी पर कुछेक उत्पादकों, वितरकों, कालाबाज़ारियों, प्रभावशाली नीति नियंताओं का कब्जा है। उनसे इस पूँजी में अपना हिस्सा पाने के लिए आज हम सब घर से अस्पताल और अस्पताल से crematorium तक श्रम कर उस पूँजी को कमाने का प्रयास कर रहें हैं।
मजदूर दिवस जिंदाबाद!!