गीता-अध्याय 1 श्लोक 9 --------------------------------- दुर्योधन पुनः द्रोण को बताता है कि इन योद्धाओं के अतिरिक्त अन्य अनेक शूरवीर जो विभिन्न अस्त्र शस्त्र में निपुण हैं वो दुर्योधन के लिए प्राण देने के लिए यँहा उसके पक्ष से लड़ने आये हैं। पुनः याद दिलाते हुए कहना है कि महाभारत का युद्ध पहले एक आंतरिक युद्ध है। इसमें प्रत्येक इंसान के अपने आसुरी और दैवी गुणों यानी उसकी बुराई और अच्छाई के बीच युद्ध होता है। मोह एक प्राथमिक अवगुण है जिसकी पूर्ति के लिए अन्य बुराइयाँ तरह तरह की शक्ति लेकर उपस्थित रहती हैं। ये बुराइयाँ मोह जनित ईक्षा की पूर्ति के लिए हर बुरा कर्म करने के लिए तैयार रहती हैं, विभिन्न तरह से इंसान की बुद्धि को नष्ट करने की क्षमता रखती हैं और विभिन्न प्रकार से उस मनुष्य की अच्छाई को खत्म करना चाहती हैं। किसी व्यक्ति या वस्तु के प्रति जब मन में मोह उतपन्न होता है तो उस मोह की पूर्ति हेतु हम हर गलत काम करने के लिए तैयार हो उठते हैं जो हमें भ्रष्ट करते जाता है। इसीलिए अधर्म के साथी ढेरों होते हैं। यही मोह मन में लालच पैदा करता है, उसक...