9 निंद्रा अंधकार का प्रतीक है, मन मस्तिष्क के सुप्तास्था का परिचायक है । निंद्रा के समय हमें बोध नहीं होता, हम सचेत नहीं होते। लेकिन जीवन में निरन्तर सजग और सावधान रहने की जरूरत होती है। यह तभी सम्भव है जब हम निंद्रा पर जीत हासिल कर पाएं हों। कभी भी , कँही भी जब हम बड़ी चुनौती से आपने सामने होते हैं तब हमारी सजगता अति उच्च स्तर की होनी ही चाहिए। थोड़ी भी शिथिलता मंहगी पड़ सकती है, समस्या किसी भी कोने से अचानक आकर हमें घेर ले सकती है, सो हम निश्चिंत होकर आरामतलबी होने का जोखिम नहीं ले सकते। बड़ी चुनौती से हम तभी निपट सकते हैं जब हमारा परिश्रम, हमारी सजगता अति उच्च स्तर की हो।
निंद्रा यानी चेतना का अभाव तब भी होता है जब हमारी बुराइयाँ हमारी अच्छाइयों को ढँक लेती हैं और हम अपने दुर्गुणों के व्यसन में डूब कर अच्छे बुरे के भान से अनजान बन जाते हैं। इसके उलट यदि हम अपनी अच्छाइयों के बल पर हैं तो फिर हमारे सद्गुण हमें हमेशा सजग रखते हैं कि हम कँही भी , कभी भी अपनी अच्छाई से गिर कर दुर्गुणों के अंधकार में न चलें जाएँ। यहॉ सजगता हमें हमारे महान उद्देश्य में सफल बनाती है।
सो हमें दुर्गुणों से उपजी निंद्रा पर सद्गुणों को बढ़ाकर निंद्रा विजयी गुडाकेश अर्जुन बनने की कोशिश करनी चाहिए।