किताबें
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खत्म नहीं होती हैं किताबे
पढ़ लेने से
किताबें तो जाती हैं बढ़ती
हर बार पढ़े जाने के बाद
किताबें , उनकी उम्र
होती है कितनी,
क्या खरीदे जाने से
बिक जाती हैं किताबें?
नहीं, कदापि नहीं,
हर बार जब
खरीदी जाती हैं किताबे,
किताबें बिकती नहीं
बढ़ जाती हैं
अपने ही
शब्दों के उम्र से आगे।
एक हाथ से दूसरे हाथ,
हाथों हाथ
किताबें आत्मा की यात्रा करती
जाती चलतीं
छोड़ती जीवन की छाप
कभी तुम उनमें होते
कभी वो तुममें होती,
एक पीढ़ी, दूसरी पीढ़ी,
पीढ़ी दर पीढ़ी
किताबें आत्मा की यात्रा
रखती जारी
शब्द, वाक्य, उद्धरण
बोलती रहते
तुम सुनते, देह बदलते
बिना गँवाये
अर्थ और भावार्थ,
चिर अनन्त
रहती हैं किताबें।
5 दिसम्बर 2020, शनिवार
पटना