महामारी में शिक्षा
Pandemic के कारण जब शिक्षण संस्थान बन्द कर दिए गए हैं और सिर्फ ऑनलाइन शिक्षा की अनुमति दी गई है तो इस व्यवस्था का सतत मूल्यांकन भी आवश्यक है और वर्तमान में pandemic की भयावहता और व्यापकता को देखते हुए ये आवश्यक है कि यदि भौतिक रूप से मूल्यांकन करना सम्भव नहीं हो तो इसका मूल्यांकन ऑनलाइन ही किया जाए। साथ ही परीक्षाओं के रद्द किए जाने और संस्थाओं के बन्द किये जाने का जो मनोवैज्ञानिक दुष्प्रभाव पड़ने या पड़ रहे होने की आशंका है उससे निबटने के लिए ऑनलाइन ही मनोवैज्ञानिक अध्ययन और सलाह की भी सख्त जरूरत है। सनद रहे कि pandemic के इस काल में कँही हम पूरी पीढ़ी को ही शैक्षणिक रूप से दिवालिया न हो जाने दें। बहुतेरे तकनीकी माध्यमों को तत्काल विकसित करने और उनका उपयोग करने की जरूरत है ताकि हम इस समय भी शिक्षा के क्षेत्र में जड़ता और अराजकता दोनों नहीं आने दें। देश का भविष्य शिक्षा पर ही टिका होता है, इसके बिना किसी भी तरह के विकास और जनोउन्मुखी राजनीति की कल्पना कोरी कल्पना ही है।