भारतीय राजनीति का दक्षिणपंथ
आधुनिक भारतीय राजनीति में सही ढंग से कोई Rightist पार्टी नहीं रही है। हाँ Leftist और Centrist रहें हैं। इन दो के अतिरिक्त जो तीसरी महत्वपूर्ण धारा भारतीय राजनीति की प्रारम्भ से रही है वह है Communalist पार्टियों की धारा। आज जब left और Centrist दल कमजोड हुए हैं तो यही Communalist धारा खुद को भारतीय राजनीति की Rightist धारा होने का दावा करती है, लेकिन उसके दावे के पक्ष में rightist दर्शन नहीं साम्रदायिक और कट्टरपंथी दर्शन रहें हैं और आज भी हैं। विश्व के Rightist पार्टीज का इतिहास देखेंगे तो अमेरिका की रिपब्लिकन और इंग्लैंड की टोरी पार्टी सबसे बड़े उदाहरण हैं और इन दोनों दलों ने समय समय पर ऐसे नेताओं और नीतियों को भी जन्म दिया है जो उन देशों के इतिहास में मील का पत्थर साबित हुए हैं। भारत के राजनीतिक दलों के लगभग 150 सालों के इतिहास में सही मायने में rightist धारा INC के अंदर ही रही जो समय समय पर महान नेताओं को सामने भी लाई। आज जो दल RIGHTIST होने का दावा करती है उसके इतिहास में तो सिर्फ साम्प्रदायिक नेतृत्व ही रहा है, सो अपनी सार्थकता साबित करने के लिए ये दल आज INC के उन नेताओं को उधार लेना चाहता है जो RIGHTIST भी थे और महान भी , जैसे पटेल, सुभाष,। लेकिन अफसोस कि ये महान RIGHTIST कभी साम्प्रदायिक नहीं रहे थे सो आज के तथाकथित RIGHTIST दल में जल्द ही मिसफिट हो जाते हैं। आज अम्बेडकर जयंती के अवसर पर भी कुछ ऐसा ही भोंडापन कुछ साम्प्रदायिक लोगों ने AMBEDKAR को नेहरू के खिलाफ खड़ा कर उनको अपना कहने का दावा किया तो बेतहाशा हँसी निकल आई!☺️☺️☺️