आत्म अन्वेषण
जीवन में दर्शन का अत्यंत महत्व होता है। इस बात को समझने के लिए ये जरूरी है कि हम ये समझें कि हर इंसान अपनी जिंदगी एक खास दृष्टिकोण से जीता है। उसकी हर गतिविधि के मूल में उसका वह विशिष्ट दृष्टिकोण बना रहता है। लेकिन अधिकांश लोग अपने जीवन में निरन्तर उपस्थित इस दृष्टिकोण के अस्तित्व से खुद वाकिफ नहीं होते हैं। यही दृष्टिकोण उनके जीवन का दर्शन होता है और अधिकांश लोग अपनी सब तरह की गतिविधियों को करते हुए भी अपने जीवन दर्शन से अनभिज्ञ बने होते हैं। उनको यही लगता है कि वे अपने वातारण में घट रही घटनाओं के प्रति प्रतिक्रिया दे रहे होते हैं या फिर उस वातावरण को खुद ही प्रभावित कर रहें होते हैं। लेकिन वे इस बात पर ध्यान नहीं देते की एक ही वातावरण में एक ही पृष्ठभूमि के दो लोगों की क्रिया और प्रतिक्रिया भिन्न हो सकती है। यदि वे इस भिन्नता को देख भी लेते हैं तो भी उनको लगता है कि इसके लिए वे कारक जबाबदेह हैं जो उनके व्यक्तित्व से बाहर की दुनिया में रहते हैं। दरअसल होता यह है कि इंसान जो कुछ खुद के बारे में सोचता और समझता है उसकी क्रिया और प्रतिक्रिया भी एकदम उसी के अनुरुप होती है। जो खुद को जिस रूप में आँकता है उसी के अनुरुप बरतता है। ज्ञान की विभिन्न शाखाओं के अनुसार, फिर चाहे वो धर्म हो, आध्यात्म हो, मनोविज्ञान हो, दर्शन हो, समाज शास्त्र हो, जीव विज्ञान या भौतिक विज्ञान हो, रसायन शास्त्र हो या आधुनिक विज्ञान अथवा दर्शन की कोई शाखा हो या कुछ और ,अलग अलग व्याख्याएँ की जाती हैं। लेकिन मूल यही है कि इंसान खुद को जितना भर जानता है उतना भर ही करता है। आप वही हैं जो आप अपनी नजर में हैं। और अपनी नजर में जो आप हैं वही आपका जीवन दर्शन है।
इसलिए जरूरी है कि इंसान खुद से वार्तालाप करना शुरू करे। जब आप खुद को टटोलते हैं, खुद से वर्तालाप करते हैं, खुद ही खुद का साक्षात्कार लेते और देते हैं तो आप खुद को खोज रहें होते हैं। इसके कारण आप समझ पाते हैं कि आप किस जीवन दर्शन का अनुकरण कर रहें हैं , उसकी खूबियाँ और खामियाँ क्या हैं और उनमें किन तरह के परिवर्तनों की जरूरत है। यह कार्य आप कई तरीकों से कर सकते हैं, मसलन अपनी आध्यात्मिकता की शरण में जाकर, अपने मनोविज्ञान का विश्लेषण कर, अपने जेनेटिक मटेरियल का अध्ययन कर, प्रबंधन के गुरु से सीख कर या किसी और तरीके से, लेकिन हर तरीके से एक ही परिणाम मिलता है। सो ये आपको तय करना है कि आप खुद को खोजने के किस तरीके या किन तरीकों को चुनना पसन्द करते हैं। लेकिन ये तय है कि जब तक आप खुद को नहीं खोजियेगा, तब तक आप ये नहीं जान -समझ पाइयेगा कि आप कुछ भी क्यों कर रहें हैं, उसको और बेहतर तरीके से कैसे कर सकते हैं और खुद के लक्ष्यों को कैसे तय कर कैसे हासिल कर सकते हैं। सो खुद के दर्शन को समझने और खुद को पाने का अभ्यास आज से ही शुरू कीजिए।